अर्थात् शेषकला को ६० से गुणा कर रवि-चन्द्र के गति योग से भाग देने पर भुक्तमान तथा ८०० में शेष कला को घटा कर अवशिष्ट ऐष्य कला को ६० से गुणा कर गति योग से भाग देने पर वर्तमान योग का गम्य (ऐशष्य ) मान होता है।
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