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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 64
नक्षत्रादीनां मानानयनम्‌ भभोगोज्ष्टशतीलिप्ता: खाश्विशैलास्तथा तिथे: । ग्रहलिप्ता भभोगाप्ता भानि भुक्त्या दिनादिकम्‌ ॥
सूर्य और चन्द्र के योग की कलाओं को भभोग ८०० से भाग देने पर लब्धि गत विष्कुम्भादि योग होते हैं। शेष को ६० से गुणा कर रवि चन्द्र के गति योग से भाग देने पर वर्तमान योग का गत-गम्य काल होता है।
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