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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 61
क्रान्तिज्या विषुवद्भाष्नी क्षितिज्या द्वादशोद्धृता । त्रिज्यागुणाष्होरात्रार्थकर्णाप्ता चरजाञउसव: ॥
क्रान्तिज्या को पलभा से गुणाकर गुणनफल में १२ का भाग देने पर लब्धि क्षितिज्या (कुज्या) होती है। कुज्या (क्षितिज्या) को त्रिज्या से गुणाकर गुणनफल को अहोगात्र के व्यासार्धरूपी कर्ण (अर्थात्‌ द्युज्या) से भाग देने पर लब्धि चरज्या होती है इसका चाप चर संज्ञक होता है।
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