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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 59
ग्रहाणां स्फुटसावनदिनमानम्‌ ग्रहोदयप्राणहता खखाष्टैकोद्धृूता गति: । चक्रासवो लब्धयुता: स्वाहोरात्रासव: स्मृता: ॥
अभीष्ट ग्रह की स्पष्टगत्ति को ग्रहनिष्ठ राश्युदयासुओं (सायन ग्रह जिस राशि पर हो उस राशि के उदयमान) से गुणाकर १८०० से भाग देने पर जो लब्धि प्राप्त हो उसे चक्रकला (२१६०० ) में जोड़ने पर अभीष्ट ग्रह के अहोरात्रासु होते है।
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