अहर्गणोत्पन्न भौम शनि और गुरु के पातों में ग्रहवत् शीघ्र फल का संस्कार करना चाहिये। अर्थात् ग्रहस्फुटीकरण में चतुर्थसंस्कार शीघ्रफल को धन हो तो धन, ऋण हो तो ऋण #रने से स्फुट शरसाधनोपयोगी पात होता है। बुध और शुक्र के पातों का तृतीयसंस्कार अर्थात् मन्दफल का विपरीत संस्कार करना चाहिये। यदि ऋण हो तो धन, धन हो तो ऋण करना चाहिये । यहाँ चन्द्रमा के पात का उल्लेख नहीं है अत: चन्द्रमा का गणितगत पात ही ग्राह्म है।
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