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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 53
ग्रहाणां वक्रारम्भे वक्रत्यागे केन्द्रांशा: कृतर्तुचन्द्रैवेदिन्े: शून्यत्र्येकेर्गुणाष्टिभि: । शरस्द्रैश्चतुर्थेषु केन्द्रांशैर्भूसुतादय: ॥
भौमादि ग्रह अपने अपने चतुर्थ शीघ्रकेन्द्र से क्रमश: १६४, १४४, १३०, १६३, तथा ११५ अंशों पर होते हैं तो इनका वक्रगतित्व आरम्भ होता है।
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