अपने शीघ्रोच्च से दूर (३ राशि अर्थात् ९० से अधिक दूरी पर) स्थित होने पर शीघ्रोच्च रश्मियों के शिथिल हो जाने से अर्थात् शीघ्रोच्चजन्य आकर्षण शक्ति के शिथिल हो जाने पर ग्रह वाम भाग में (अन्य नीच स्थानीय) आकर्षण शक्ति के प्रभाव से आकृष्ट हो कर वक्री हो जाते हैं।
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