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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 37
ओजान्ते द्वित्रियमला द्विविश्वे यमपर्वता: । खर्तुदस्त्ना वियद्वेदा: शीघ्रकर्मणि कीरत्तिता: ॥
अर्थात्‌ समपद (२, ४) में भौम का शीघ्र परिध्यंश २३५, बुध का १३३, गुरू का ७०, शुक्र का २६२ तथा शनि का ३९ तथा विषम पद (१, ३) में भौम का २३२, बुध का १३२, गुरू का ७२, शुक्र का २६० तथा शनि का ४० अंश कहा गया है।
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