मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 36
भौमादीनां शीघ्रपरिध्यंशा: कुजादीनामत: शैघ्या युग्मान्तेड्थाग्निदस्नका: । गुणाग्निचन्द्रा: खनगा द्विरसाक्षीणि गोड्ग्नय: ॥
समपदान्त में भौमादि ग्रहों के शीघ्र परिध्यंश क्रम से २३५, १३३, ७०, २६२, ३९ अंश होते हैं तथा विषम पदान्त में क्रमश: २३२, १३२, ७२, २६०, ४० अंश शीघ्रफल साधन हेतु शीघ्र परिध्यंश कहे गये हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें