जिस चाप की ज्या अभीष्ट हो, उस चाप की कला को २२५ से भाग देने पर लब्धि गत ज्यापिण्ड होता है। शेष को ऐष्य (अग्रिम) ज्या पिण्ड और गत ज्या पिण्ड के अन्तर से गुणा कर
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