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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 25
शरार्णवहुताशैका भुजड्भाक्षिशरेन्दव : । नवरूपमही ध्रैका गजैकाइ्ूनिशाकरा: ॥
(१४) शरार्णवहुताशैका: = १३४५ (१५) भुजड़ाक्षिशरेन्द्व: = १५२८ (१६) नवरूपमहीघ्रैका = १७१९ (१७) गजेकाड्ूनिशाकरा = १९१८
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