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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 23
साधितान्युत्क्रमज्या पिण्डान्याह मुनयो रन्ध्रयमला रसषट्का मुनीश्वरा: । द्ग्ष्टेका रूपषड्दस्त्रा: सागरार्थहुताशना: ॥
(१) मुनय: = ७ (२) रन्प्रयमला = २९ (३) रसषट्का: = ६६ (४) मुनीश्वरा: = ११७ (५) द्व्यष्टेका = १८२ (६) रूपषड्टस्त्र = २६१ (७ ) सागरार्थहुताशना = ३५४
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