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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 21
षट्पठ्चलोचनगुणाश्चन्द्रनेत्रागिनविवहनय: । यमाद्रिवहिनज्वलना रन्श्रशून्यार्णवाग्गय: ॥ रूपाग्निसागर॒गुणा वस्वग्निकृतवहनय: ।
(१९) षट्पञज्चलोचनगुणा: = ३२५६ (२०) चन्द्रनेत्राग्विविहनय: = ३३२१ (२१) यमाद्रिवहिनज्वलना: = ३३७२ (२२) रन्श्रशून्यार्णवाग्गय: = ३४०९ (२३) रूपाग्निसागरगुणा: = ३४३१ (२४) वस्वग्निकृतवहनय: = ३४३८
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