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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 18
शून्यलोचनपज्चैकाश्छिद्ररूपमुनीन्दव: । वियच्चन्द्रातिधृतयों गुणरन्ध्राम्बराश्विन: ॥
(७ ) शून्यलोचनपञ्चैक: = १५२० (८) छिद्ररूपमुनीन्दव: = १७१५९ (९) वियच्चान्द्रातिधृतय: = १९१० (१०) गुणरश्राम्बराश्विन: = २०९३
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