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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 17
चतुर्विशति ज्यापिण्डानां मानानि तत्वाश्विनोड्छ्ाब्धिकृता रूपभूमिधरत्तव: । खाह्डाष्टो पञ्चशून्येशा बाणरूपगुणेन्दव: ॥
एक वृत्तपाद में साधित २४ ज्या पिण्डों के मान क्रम से इस प्रकार हैं:- (१) तत्वाश्विन: = २२५ (२) आड्डब्धिकृत: = ४४९ (३) रूपभूमिधरत्तव: = ६७१ (४) खाड्डाष्टौ = 55८९० (५) पज्चशून्येशा: = ११०५ (६) बाणरूपगुणेन्दव: - १३१५
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