मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 14
स्फुटीकरण प्रयोजनम्‌ तत्तद्गतिवशानिनत्य यथा दृक्तुल्यतां ग्रहा: । प्रयान्ति तत्‌ प्रवक्ष्यामि स्फुटीकरणमादरात्‌ ॥
उन (पूर्वोक्त) गतियों के अनुसार प्रतिदिन ग्रह जिस प्रकार दृकतुल्य हो जाते हैं (अर्थात्‌ जिस स्थान पर वेध द्वारा दृग्गोचर होते हैं) उस स्पष्टीकरण प्रक्रिया को मैं आदरपूर्वक कह रहा हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें