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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 10
भौमादयोउ्ल्पमूर्त्तित्वाच्छीप्रमन्दोच्चसंज्ञ के: । देवतैरपकृष्यन्ते सुदूरमतिवेगिता: ॥
भौमादि पज्चताराग्रह लघु विम्बात्मक होने के कारण अपने-अपने शीतपघ्रोच्च और मन्दोच्च रूपी अदृश्य दैवी शक्तियों द्वारा अत्यन्त वेग पूर्वक सूटूर (अधिक टूरी तक) अपकृष्ट हो जाते हैं।
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