भौमादि पज्चताराग्रह लघु विम्बात्मक होने के कारण अपने-अपने शीतपघ्रोच्च और मन्दोच्च रूपी अदृश्य दैवी शक्तियों द्वारा अत्यन्त वेग पूर्वक सूटूर (अधिक टूरी तक) अपकृष्ट हो जाते हैं।
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