भगण (क्रान्तिवृत्त) पर अश्रित शीघ्रोच्च, मन्दोच्च एवं पात संज़्क काल की अदृश्य मूर्तियाँ ग्रहों की गति का कारण होती हैं। अर्थात् इन्हीं अदृश्य मूर्तियों के कारण ग्रहपिण्डों में गति उत्पन्न होती है।
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