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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 8
तंदन्तरेषु संक्रान्तिद्वितयं द्वितय पुनः। नैरन्तर्यात्‌ तु संक्रान्तेज्ञेयं विष्णुपदीद्वयम्‌ ।।
अव्यवहित क्रम से उक्त चार संक्रान्तियों के बाद वाली १-१ संक्रान्ति विष्णुपदी संज्ञक होती है। इस प्रकार विषुव संक्रान्तियों में दो तथा अयन संक्रान्तियों में दो विष्णुपदी संक्रान्तियाँ होती है।
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