मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 7
विषुवायनसंज्ञा संक्रान्तिनाउच ज्ञानम्‌ भचक्रनाभौ विषुवद्द्वितयं समसूत्रगम्‌ । अयनद्वितयं चैव चतत्त्र: प्रथितास्तु ता:॥
राशि चक्र में समसूत्रगत दो विषुव संक्रन्तियाँ तथा एक ही व्यास रेखागत २ आयन संक्रान्तियाँ कुल चार संक्रान्तियाँ प्रसिद्ध हैं। इन संक्रान्तियों के मध्य में २-२ संक्रान्तियाँ होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें