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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 3
सौरमानानां व्यवहार: सौरेण द्युनिशोर्मानं षडशीतिमुखानि च । अयन विषुवच्चैव सक्रान्ते: पुण्यकालता ॥
दिन-रात्रि का मान, षडशीतिमुख संक्रान्तियों का मान, अयन (दक्षिणायन, उत्तरायण), विषुव (सौम्यगोल, याम्यगोल) तथा संक्रान्तियों का पुण्यकाल सौरमान से ज्ञात किया जाता है।
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