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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 27
स तेभ्य: प्रददौ प्रीतो ग्रहाणां चरितं महत्‌ । अत्यद्भुततमं लोके रहस्य॑ ब्रह्मसम्मितम्‌ ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते मानाध्याय: सम्पूर्ण: ॥ ॥ समाप्तोष्यं ग्रन्थ: ॥
मय दानव ने प्रसन्‍न होकर, लोक में अत्यन्त रहस्यमय ब्रह्म संज्ञक (ब्रह्मज्ञान) इस ज्ञान को जिज्ञासु ऋषियों को प्रदान किया।
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