ज्ञात्वा तमृषयश्चाथ सूर्यलब्धवरं मयम् ।
परिबब्लुरुपेत्याथो ज्ञान पप्रच्छुरादरात् ॥
मय ने सूर्य से ज्योतिष ज्ञान रूपी वरदान प्राप्त कर लिया है, ऋषि लोग यह जान कर मय के पास आये और आदर के साथ उक्त ज्ञान के विषय में पूछा।
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