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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 24
इत्युक्त्वा मयमामन्त्रय सम्यक्‌ तेनाभिपूजित: । दिवमाचक्रमेड्काश: प्रविवेश स्वमण्डलम्‌ ॥
इस प्रकार मय से भलीभाँति कहकर (सम्यग्‌ ज्यौतिष शास्त्र का उप्देश कर) सूर्याशावतार पुरुष मय से पूजित होकर स्वर्ग में चंक्रमण करते हुये अपने मण्डल (सूर्य मण्डल) में प्रविष्ट हो गये।
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