इस प्रकार मय से भलीभाँति कहकर (सम्यग् ज्यौतिष शास्त्र का उप्देश कर) सूर्याशावतार पुरुष मय से पूजित होकर स्वर्ग में चंक्रमण करते हुये अपने मण्डल (सूर्य मण्डल) में प्रविष्ट हो गये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।