मय प्रति महात्म्यकथनम्
एतत् ते परमाख्यातं रहस्यं परमाद्भुतम् ।
ब्रह्तत् परम पुण्य सर्वपापप्रणाशनम् ॥
इस समय जो परभाग (भूगोलाध्यायादि उत्तरार्ध) का वर्णन किया गया है वह परम अदुभुत, रहस्यमय तथा ब्रह्मस्वरूप है। अत: यह शास्त्र पुण्य प्रदान करने वाला तथा सभी पापों का नाश करने वाला होगा।
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