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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 21
मन्वन्तरव्यवस्था च॑ भ्राजापत्यमुदाहतम्‌ । न तत्र द्युनिशोर्भेदो ब्राह्म॑ कल्प: प्रकीर्तितम्‌ ॥
मन्वन्तर व्यवस्था (अर्थात्‌ ७१ महायुगों का १ मनु) प्राजापत्य मान कहा गया है। वहाँ (मन्वन्तर मान में ) दिन-रात्रि का भेद नहीं होता। कल्प का मान ब्राह् मान कहा जाता है। क्‍योंकि १ कल्प के तुल्य ब्रह्मा का एक दिन और उतनी की ही एक रात्रि होती है।
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