मन्वन्तर व्यवस्था (अर्थात् ७१ महायुगों का १ मनु) प्राजापत्य मान कहा गया है। वहाँ (मन्वन्तर मान में ) दिन-रात्रि का भेद नहीं होता। कल्प का मान ब्राह् मान कहा जाता है। क्योंकि १ कल्प के तुल्य ब्रह्मा का एक दिन और उतनी की ही एक रात्रि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।