इन सावन दिवसों से ही यज्ञ आदि के कार्यों के लिए समय का निर्णय किया जाता है। सूतकादि का निर्धारण, दिन, मास और वर्ष स्वामियों का निर्णय तथा मध्यम ग्रहगति का निर्णय सावन मान से ही किया जाता है।
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