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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 18
सप्रयोजनं सावनमानम्‌ उदयाडुदय भानो: सावन तत्‌ प्रकीर्तितम्‌ । सावनानि स्युरेतेन यज्ञकालविधिस्तु तै:॥
सूर्य के एक उदय से दूसरे उदय पर्यन्त का समय सावनदिन संज्ञक होता है। अर्थात्‌ एक ही क्षितिज पर दो सूर्योदयों के-मध्य का काछ एक सावन दिन होता है।
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