कृत्तिकादि दो दो नक्षत्रों के संयोग से कार्तिक आदि मास, अन्तिम, उपान्तिम और पाँचवाँ मास तीन-तीन नक्षत्रों के संयोग से होते हैं। जैसे - कृतिका या रोहिणी पूर्णिमा को हो तो कार्तिक, मृर्गशीर्ष या आर्द्रा से मार्गशीर्ष आदि मास होते हैं। अन्तिम (कार्तिकादि गणना से) आश्विन, उपान्तिम भाद्रपद तथा पजञ्चम फाल्गुन मास तीन तीन नक्षत्रों से होते हैं। जैसे - पू. फा., उ. फा., हस्त इन तीन नक्षत्रों से फाल्गुन मास होता है)।
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