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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 15
नाक्षत्रमानम्‌ भचक्रभ्रमणं नित्य नाक्षत्रं. दिनमुच्यते । नक्षत्रनाम्ना मासास्तु ज्ञेया: पर्वान्तयोगत: ॥
भचक्र (नक्षत्र मण्डल) का दैनिक भ्रमण एक नाक्षत्र दिन होता है। (अर्थात्‌ जितने काल में नक्षत्र मण्डल का एक चक्रभ्रमण पूर्ण होता है उतना काल नाक्षत्र दिन होता है)। पर्वान्त से (पूर्णिमा के दिन) जिस नक्षत्र का योग होता है उसी नक्षत्र के नाम से मासों के नाम होते हैं।
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