तिथि, करण, विवाह, क्षौर (मुण्डन) तथा जातकर्म प्रभूति अन्य सभी कार्य, ब्रत-उपवास तथा यात्रा की क्रियायें चान्द्रमान से व्यवहत होती हैं।
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