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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 14 • श्लोक 10
द्विशिनाथा ऋतवस्ततोडषपि शिशिरादय: । मेषादयो द्वादशैते मासास्तैरेव वत्सर: ॥
दो-दो राशियों के भोगकाल को ऋतु कहा जाता (अर्थात्‌ दो राशियों तक सूर्य एक ऋतु में रहता) है। शिशिरादि ऋतुओं की प्रवृत्ति मकर राशि से होती है। अर्थात्‌ मकर-कुम्भ में सूर्य के रहने पर शिशिर ऋतु, मीन-मेष में वसन्‍त आदि। मेषादि १२ बारह राशियों में सूर्य के रहने से १२ बारह मास होते है। तथा इन्हीं १२ मासों से १ सौर वर्ष होता है।
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