नवविधकालमानानि
ब्राह्मं दिव्यं तथा पित्र्यं प्राजापत्यं च गौरवम् ।
सौरज्य सावन चान्द्रमार्श्त मानानि बे नव ॥
ब्राह्य, दिव्य, पित्र्य, प्राजापत्य, गौरव (गुरु सम्बन्धी बार्हस्पत्य), सौर, सावन, चान्द्र तथा नाक्षत्र ये नव प्रकार के काल मान बताये गये हैं।
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