सप्तर्षीणामगस्त्यस्य ब्रह्मादीनां च कल्पयेत् ।
मध्ये वैषुवती कक्षा सर्वेषामेव संस्थिता ॥
सभी अहोरगात्र वृत्तों के मध्य में विषुवद्वृत्तीय कक्षा होती हैं।
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