कक्षा आधार अथांत् विषुवत् वृत्त से दक्षिण और उत्तरभाग में स्थित नक्षत्रों, अभिजितू, सप्तर्षिमण्डल, अगस्त्य, ब्रह्महदय, लुब्धक आदि के भी अहोगात्र वृत्तों की रचना करनी चाहिये।
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