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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 13 • श्लोक 25
ग्रन्थमाहात्म्यम्‌ ग्रहनक्षत्रचरितं ज्ञात्वा गोल च तत्त्वत:। ग्रहलोकमवाणोति पर्यायेणात्मवान्‌ नर: ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते ज्यौतिषोपनिषदध्याय: सम्पूर्ण: ॥
ग्रह नक्षत्रों के चरित (अर्थात्‌ उनकी स्थिति गत्यादि) को तथा गोल को यथार्थ रूप में जानकर मनुष्य ग्रहलोक को प्राप्त करता है तथा जन्मान्तर में भी आत्मज्ञानी होता है।
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