नराख्यं शड्कुयन्रम्
नरयन्त्र तथा साधु दिवा च विमले रवौ ।
छायासंसाधनै: प्रोक्त कालसाधनमुत्तमम् ॥
केवल दिन में जब आकाश स्वच्छ हो तथा निर्मल रवि हो उस समय शंकु यंत्र से सम्यक् छाया साधन करने से उत्तम काल का ज्ञान होता है अर्थात् शुद्ध कालज्ञान होता है।
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