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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 13 • श्लोक 23
कपालाख्यं जलयत्म्‌ ताप्रपात्रमधशिद्द्र न्यस्तं कुण्डेजमलाम्भसि । पष्टिम॑ज्जत्यहोरात्रे स्फूटं यत्् कपालकम्‌ ॥
ताम्रपात्र के नीचे (पेटे में) छिद्र कर स्वच्छ जल वाले कुण्ड में डाल दें। यदि एक अहोरात्र में (६० घटी में) वह ६० बार जल में डूब जाय तो वही शुद्ध कपालयन्त्र होता है।
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