ताम्रपात्र के नीचे (पेटे में) छिद्र कर स्वच्छ जल वाले कुण्ड में डाल दें। यदि एक अहोरात्र में (६० घटी में) वह ६० बार जल में डूब जाय तो वही शुद्ध कपालयन्त्र होता है।
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