पारदाराम्बुसूत्राणि शुल्वतैलजलानि च ।
बीजानि पांसवस्तेषु प्रयोगास्तेजपि दुर्लभा:।।
यंत्र को गतिशील करने के लिए उसमें पारा, आरा (सूत्र विशेष), जल, सूत्र, ताम्र, तैल एवं जल का प्रयोग करना चाहिये। पारा और पांसु (रेत) को यन्त्र में स्थापित करना चाहिये किन्तु ये प्रयोग भी दुर्लभ (कठिन) हैं।
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