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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 13 • श्लोक 2
पारम्पर्योपदेशेन यथा ज्ञान गुरो्मुखात । आचार्य: शिष्यबोधार्थ सर्व प्रत्यक्षदर्शिवान्‌ ॥ भूभगोलस्य रचनां कुर्यादाश्चर्यकारिणीम्‌ ।
की पूजा कर परम्परा से प्राप्त उपदेशों द्वारा तथा गुरु के मुखारविन्द से प्राप्त यथार्थ ज्ञान से शिष्यों को अवगत कराने हेतु, सब कुछ प्रत्यक्ष प्रदर्शित करने वाले तथा आश्चर्य उत्पन्न करने वाले पृथ्वी और खगोल (यन्त्र) की रचना आचार्य को करनी चाहिये।
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