लोकालोक अर्थात् दृश्य और अदृश्य गोल के नियामक क्षितिज वृत्त से वेष्टित पूर्वोक्त विधि से निर्मित गोल को वस्त्र से ढक दें। वस्त्राच्छन्नन गोल पर जल धारा का ऐसा प्रवाह करें जिससे कि गोल भ्रमण करता हुआ नाक्षत्र काल को सूचित करे। (अर्थात् गोल भ्रमण से नाक्षत्र मान की किसी इकाई का साधन हो सके)
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