मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 13 • श्लोक 14
अन्त्याचरज्या-स्थानम्‌ स्वक्षितिजज्च मध्यक्षितिजयोर्मध्ये या ज्या साउन्त्याउभिधीयते । ज्ञेया चरदलज्या च विषुवतक्षितिजान्तरम्‌ ।।
मध्य स्थान (अहोरात्र वृत्त और याम्योत्तर वृत्त के सम्पात बिन्दु) से क्षितिज वृत्त पर्यन्त ज्या रेखा अन्त्या संज्ञक होती है। (अर्थात्‌ याम्योत्तर वृत्त और क्षितिज वृत्त के मध्यवर्ती अहोरात्रवृत्त के चाप की ज्या अन्त्या होती है)। विषुवत क्षितिज अर्थात्‌ उन्मण्डल वृत्त और अपने क्षितिज वृत्त के अन्तर की ज्या चरज्या होती है। क्षितिज और उन्मण्डल वृत्त के मध्य अहोरात्र वृत्त खण्ड की ज्या, कुज्या होती है इसे त्रिज्यावृत्त में परिणत करने पर चरज्या होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें