अन्त्याचरज्या-स्थानम् स्वक्षितिजज्च
मध्यक्षितिजयोर्मध्ये या ज्या साउन्त्याउभिधीयते ।
ज्ञेया चरदलज्या च विषुवतक्षितिजान्तरम् ।।
मध्य स्थान (अहोरात्र वृत्त और याम्योत्तर वृत्त के सम्पात बिन्दु) से क्षितिज वृत्त पर्यन्त ज्या रेखा अन्त्या संज्ञक होती है। (अर्थात् याम्योत्तर वृत्त और क्षितिज वृत्त के मध्यवर्ती अहोरात्रवृत्त के चाप की ज्या अन्त्या होती है)। विषुवत क्षितिज अर्थात् उन्मण्डल वृत्त और अपने क्षितिज वृत्त के अन्तर की ज्या चरज्या होती है। क्षितिज और उन्मण्डल वृत्त के मध्य अहोरात्र वृत्त खण्ड की ज्या, कुज्या होती है इसे त्रिज्यावृत्त में परिणत करने पर चरज्या होती है।
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