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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 13 • श्लोक 12
ग्रहविमण्डलानि चन्द्राद्याश्व स्वके: पातैरपमण्डलमाश्रितै: ॥ ततोज्पकृष्टा दृश्यन्ते विक्षेपान्तेष्वपक्रमात्‌ ।
चन्द्रादि ग्रहों की कक्षायें क्रान्तिवत्त से सम्बन्धित (आश्रित) अपने अपने सम्पात्‌ बिन्दुओं से अपनी-अपनी क्रान्ति तुल्य अन्तरित होते हुये विक्षेप के अग्रभाग में दिखलाई पड़ती हैं। (ग्रहों की इन कक्षाओं को विमण्डल वृत्त कहते हैं प्रत्येक ग्रह अपने अपने विमण्डल में भ्रमण करते हैं)।
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