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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 90
खकक्षायोजनमानम्‌ खव्योमखत्रयखसागरषट्कनागव्योमाष्टशून्य यमरूपनगाष्टचद्धा: । ब्रह्माण्डसम्पुटपरि भ्रमणं समन्‍्ता. दभ्यन्तरे दिनकरस्य करप्रसार: ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते भूगोलाध्याय: सम्पूर्ण: ॥
इस ब्रह्माण्ड (कटाह सम्पुट) की भीतरी परिधि के अन्दर चारों तरफ सूर्य की किरणों का विस्तार है। अर्थात्‌ जहाँ तक सूर्य रश्मियाँ जाती हैं वहीं तक खकक्षा है। खकक्षा का मान १८७१२०८०८६४०००००० योजन है।
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