इस ब्रह्माण्ड (कटाह सम्पुट) की भीतरी परिधि के अन्दर चारों तरफ सूर्य की किरणों का विस्तार है। अर्थात् जहाँ तक सूर्य रश्मियाँ जाती हैं वहीं तक खकक्षा है। खकक्षा का मान १८७१२०८०८६४०००००० योजन है।
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