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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 9
प्रश्नोपसंहार: एवं मे संशयं छिन्धि भगवन्‌! भूतभावन! । अन्यो न त्वामृते छेत्ता विद्यते सर्वदर्शिवान्‌ ॥
हे भूत भावन भगवान्‌! मेरे इन संशयों को दूर करें। आप सर्वद्रष्टा हैं। अत: आपके अतिरिक्त अन्य कोई भी मेरे इन संशयों को दूर करने में समर्थ नहीं है।
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