सूर्य के भ्रमण मार्ग अर्थात् कक्षा योजन को ६० से गुणा करने पर नक्षत्र कक्षा का मान होता है। उन्हीं योजन प्रमाणों से सभी ग्रहों के ऊपर भमण्डल (नक्षत्र मण्डल) भ्रमण करता है।
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