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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 80
भकक्षामानम्‌ भवेद्‌ भकक्षा तीक्ष्णांशोर्भ्रमणं षष्टिताडितम्‌ । सर्वोपरिष्टाद्‌ भ्रमति योजनैस्तैर्भमण्डलम्‌ ॥
सूर्य के भ्रमण मार्ग अर्थात्‌ कक्षा योजन को ६० से गुणा करने पर नक्षत्र कक्षा का मान होता है। उन्हीं योजन प्रमाणों से सभी ग्रहों के ऊपर भमण्डल (नक्षत्र मण्डल) भ्रमण करता है।
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