देवासुरपितृणां सूर्य दर्शनकाल:
सकृदुद्गतमब्दार्ध पश्यन्त्यर्क॑ सुरासुरा: ।
पितर: शशिगा: पक्ष स्थदिनं च नरा भुवि ॥
देवता और असुर (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) दोनों ही एक बार सूर्योदय होने पर उसे आधे वर्ष अर्थात् ६ मास तक देखते रहते हैं (देव और असुरों के भाग में ६ मास का दिन और ६ मास की रात्रि होती है)। चन्द्रमा के पृष्ठ भाग में रहने वाले पितृगण १५ दिन (१ पक्ष) तक सूर्य का दर्शन करते हैं अर्थात् चन्द्र के पृष्ठ में १५ दिनों का दिन तथा १५ दिनों की रात्रि होती है। जबकि भूपृष्ठ वाले मनुष्य गण अपने अपने स्थानीय दिनमान के अनुसार सूर्य (दिन) का अवलोकन करते हैं।
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