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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 73
भचक्रभ्रमणम्‌ भचक्र श्वुवयोर्बद्धमाक्षिप्तं प्रवहानिले: । पर्यत्यजस्नं तन्‍्नद्धा ग्रहकक्षा यथाक्रमम्‌ ॥
नक्षत्र चक्र ध्रुवों से आबद्ध होकर प्रवह वायु के वेग से प्रेरित होकर निरन्तर भ्रमण करता रहता है तथा नक्षत्र चक्र से आबद्ध ग्रह कक्षायें भी क्रमानुसार भ्रमण करती हैं।
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