इन दोनों बिन्दुओं या अहोणात्र वृत्तों (धनुरन्त से मिथुनान्त तक) के मध्यगत प्रदेशों में ही मध्याहनकालिक शड्कुच्छाया उत्तराभिमुखी या दक्षिणाभिमुखी हो सकती है। इससे भिन्न (२४ से अधिक) प्रदेशों में अपने अपने ध्रुवों की तरफ छाया जाती है। उत्तर गोल में उत्तराभिमुखी दक्षिण गोल में दक्षिणामिभमुखी छाया पड़ती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।