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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 12 • श्लोक 68
सूर्यस्य स्थिति वशात्‌ छाया निरूपणम्‌ भूमण्डलात्‌ पजञ्चदशे भागे देवेड्थवाञसुरे । उपरिष्टाद्व्रजत्यर्क: सौम्ययाम्यायनान्तग: ॥
भूमण्डल के १५ वें भाग अर्थात्‌ २४ पर देवताओं एवं असुरों दोनों के भागों में अर्थात्‌ निरक्ष से २४ उत्तर एवं २४ दक्षिण उत्तरायण और दक्षिणायन के अन्तिम बिन्दु मिथुनानत अहोरात्रवृत्त तथा धनुरन्‍त अहोरात्र वृत्त में सूर्य खमध्य में होता हुआ भ्रमण करता है।
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